इन 6 शुभ योगों में देव उठनी एकादशी व्रत 2025: शुभ समय में पूजा-अर्चना से होती है मनोकामना पूरी

Dev Uthani Ekadashi 2025

क्या आप भी अपने जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति चाहते हैं? क्या आप ऐसे अवसर की तलाश में हैं जो आपकी मनोकामनाओं को पूरा कर सके? तो आइए, Planet Power आपको एक ऐसे विशेष दिन के बारे में बताता है जो आपके लिए वरदान साबित हो सकता है – देव उठनी एकादशी, जो इस वर्ष 2 नवंबर 2025 (रविवार) को मनाई जाएगी।

देव उठनी एकादशी का महत्व

🕉 व्रत का धार्मिक महत्व

देव उठनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के चार महीने की योगनिद्रा से जागरण का प्रतीक है। इस दिन भक्तजन भगवान विष्णु को जगाने के लिए विशेष पूजा-अर्चना और तुलसी विवाह करते हैं।

मनोकामना पूर्ति में व्रत की भूमिका

माना जाता है कि इस दिन किया गया व्रत और पूजन आपकी हर मनोकामना को पूरा करता है।

लाभ विवरण
आर्थिक समृद्धि धन-धान्य में वृद्धि
परिवारिक सुख घर में शांति और खुशहाली
आरोग्य स्वास्थ्य में सुधार
आध्यात्मिक उन्नति मोक्ष की प्राप्ति

देव उठनी एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि व्यक्तिगत और आध्यात्मिक विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।

6 शुभ योग और उनका प्रभाव (2025 में विशेष संयोग)

इस वर्ष देव उठनी एकादशी के दिन 6 शुभ योगों का संयोग बन रहा है —
सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग, त्रिपुष्कर योग, द्विपुष्कर योग और पुष्य नक्षत्र योग

योग विशेष महत्व
सर्वार्थ सिद्धि योग सभी कार्यों में सफलता
अमृत सिद्धि योग दीर्घायु और स्वास्थ्य लाभ
रवि योग आत्मविश्वास और तेजस्विता
त्रिपुष्कर योग धन एवं व्यवसाय में वृद्धि
द्विपुष्कर योग ज्ञान एवं निर्णय क्षमता में वृद्धि
पुष्य नक्षत्र योग आध्यात्मिक उन्नति और शांति

इन योगों का संयुक्त प्रभाव जीवन में सौभाग्य, सफलता और शांति लाता है।

पूजा-अर्चना का शुभ समय (देव उठनी एकादशी 2025)

  • एकादशी तिथि प्रारंभ: 1 नवंबर 2025, शाम 09:11 बजे
  • एकादशी तिथि समाप्त: 2 नवंबर 2025, शाम 07:31 बजे

शुभ मुहूर्त:
सूर्योदय से दोपहर 12:00 बजे तक का समय पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
अभिजित मुहूर्त: सुबह 01:11 से 03:23 तक — विशेष रूप से शुभ।

ग्रह शुभ स्थिति
चंद्रमा वृषभ राशि में उच्च स्थिति में
बृहस्पति अपनी अनुकूल राशि में (केंद्र में)
शुक्र लग्न से नवम भाव में

लाभ:

  • सकारात्मक ऊर्जा का अधिकतम प्रभाव
  • मनोकामना पूर्ति
  • आध्यात्मिक संतुलन
  • जीवन में सुख-समृद्धि

पूजा-अर्चना की विधि

आवश्यक सामग्री

  • तुलसी पत्र
  • चंदन, कुमकुम, अक्षत
  • पुष्प, धूप, दीप
  • नैवेद्य (फल, मिष्ठान्न)

पूजा के चरण

  1. स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें
  2. भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
  3. दीप प्रज्वलित करें और पुष्प अर्पित करें
  4. मंत्र जप करें – “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
  5. आरती करें और प्रसाद वितरण करें

मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष उपाय

उपाय लाभ
संकल्प लें लक्ष्य की स्पष्टता और दृढ़ता
दान करें पुण्य प्राप्ति और कर्म शुद्धि
जप-ध्यान करें मानसिक शांति और एकाग्रता
सात्विक आहार लें शरीर और मन की शुद्धि

संकल्प की शक्ति – स्पष्ट उद्देश्य और श्रद्धा के साथ किया गया व्रत दिव्य परिणाम देता है।
दान-धर्म – गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र या धन का दान करें।
जप और ध्यान – नियमित ध्यान से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

एस्ट्रो टीना की दृष्टि में देव उठनी एकादशी 2025

एस्ट्रो टीना, एक प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्या और वास्तु विशेषज्ञ हैं, जो वर्षों से आध्यात्मिक साधना और ज्योतिष के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनके अनुसार, 2025 की देव उठनी एकादशी विशेष रूप से फलदायी है क्योंकि 6 शुभ योगों का संगम व्यक्ति के जीवन में चमत्कारिक परिवर्तन ला सकता है।

निष्कर्ष

देव उठनी एकादशी 2025 का पर्व 2 नवंबर 2025 को मनाया जाएगा। इस वर्ष छह शुभ योगों का संयोग इसे अत्यंत शुभ बनाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, संकल्प, दान और जप-ध्यान से न केवल मनोकामनाएँ पूर्ण होती हैं बल्कि जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और समृद्धि भी आती है। यदि आप इस पावन अवसर पर अपने जीवन से जुड़े ज्योतिषीय मार्गदर्शन या व्रत-पूजा के सही मुहूर्त जानना चाहते हैं, तो Astrologer near me से संपर्क करके उचित सलाह प्राप्त कर सकते हैं।